नई दर्द शायरी सोचता हूँ क्या

सोचता हूँ क्या पुकारूँ तुझे,
सोचता हूँ तुझे दिल में बसाऊँ या नहीं,
गलत ना समझना मुझे, ऐसा नहीं है की आपसे प्यार नहीं करते हैं हम,
पर जो आप कभी रूठ गए तो कैसे जियेंगे, ये सोच कर डरते है हम।

अब तो आप दिल में इस कदर बस गए हो,
की आप हमारी हर दुआ का हिस्सा बन गए हो,
कभी आपको कोई गम न देगा ये वादा लिया है हमने रब से,
बदले में वादा किया है हमने की और कुछ ना मांगेगे उससे।

सोचता हूँ क्या फर्क पड़ता है कुछ भी बुलाऊँ तुझको,
यकीन है मेरी आवाज़ सुन कर जवाब तो आप डोज मुझको,
जो कभी आप खफा हो भी गए हमसे, कुछ भी कर के मन ही लेंगे,
यकीन है इस मोहब्बत के रिश्ते पर, भरोसा है इस प्यारी सी दोस्ती पर –
आप भी ज्यादा देर तक हमसे नाराज़ रह नहीं पाएंगे।

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