गर आपकी नज़रें हम से मिलीं

गर आपकी नज़रें हम से मिलीं हम ख़ुद के नहीं रह जायेंगे
जब इश्क़ हमें हो जायेगा हम उसमें कहीं बह जायेंगे

हर रोज़ मुख़ातिब होते हैं ख़्वाबों में आपके चेहरे से
ये ख़्वाब अगर सच हो जायें दुनियाँ में आग लगायेंगे

हर एक अदा को आपकी हम छुप-छुप कर देखा करते हैं
और सोचते हैं हम भी एक दिन इनके आगे इतरायेंगे

ख़ुद आप हमें गुस्ताख़ी पर मजबूर किया करते हैं मगर
इल्ज़ाम हमारे सर होगा तोहमत ख़ुद आप लगायेंगे

एक छोटी सी उम्मीद है की हमसफ़र बनेंगे हम दोनों
और इस उम्मीद के साये में लम्हों से गुज़रते जायेंगे।

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